आसींद। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ बदनोर में युवाचार्य मधुकर मुनि म. सा. की सुशिष्या महासती कमलप्रभा म.सा. आदि ठाणा-5 के सानिध्य में युवाचार्य मधुकर मुनि का 40 वा एवम प्रवर्तक मदन मुनि का तृतीय स्मृति दिवस तप त्याग के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में साध्वी कमल प्रभा ने कहा कि भारत ऋषि मुनियों की भूमि है, गंगा का जल और वृक्ष का फल सबके लिए होता है उसी प्रकार महापुरुषों का आशीर्वाद जन-जन के लिए होता है। युवाचार्य मधुकर मुनि म.सा. ने जोधपुर जिले के तिंवरी की धरा पर माता तुलसा एवं पिता जमनालाल के आंगन में जन्म लेकर उस धरा को धन्य कर दिया। मात्र 10 वर्ष की बाल्यावस्था में दीक्षा लेकर गुरु सेवा और श्रुतसेवा में अपना संपूर्ण जीवन लगा दिया। 70 वर्ष तक संयम जीवन का पालन किया। वे *मीठा मिश्री* के नाम से जाने गए क्योंकि वह हमेशा मीठा बोलते थे। चेहरे की मधुर मीठी मुस्कान आज भी हमारी आंखों के सामने तैर रही है ।उनका सानिध्य जिसने भी पाया वह धन्य धन्य हो गया। जैन जगत के 32 आगम संपादन का एक ऐसा ऐतिहासिक कार्य किया जो उन महापुरुषों की ज्ञान गरिमा तथा श्रुतसेवा को शताब्दियों तक जीवित रखेगा। साध्वी तरुणप्रभा सुदर्शनप्रभा एवं मणिप्रभा ने गीतिका के माध्यम से अपने विचारों को व्यक्त किया।
साध्वी लब्धिप्रभा ने कहा कि उनका अध्ययन अध्यापन गहन गंभीर था, उन्होंने गुरुदेव की पावन छत्र छाया में संस्कृत, प्राकृत, व्याकरण काव्य छंद कोष इत्यादि का अध्ययन एवं विनम्रता सरलता से बहुश्रुत की उपाधि को प्राप्त किया
गुरुदेव का जीवन सद्गुणों का भंडार था उन्होंने अपने जीवन का कण-कण और क्षण -क्षण जिनशासन के लिए समर्पित कर दिया। वे मोह के पद का नहीं मोक्ष के पद का ध्यान रखते थे। 26 नवंबर 1983 को नासिक में आपका देवलोक गमन हो गया सबको ज्योति देने वाली वह ज्योति अस्त हो गई लेकिन उन गुरुदेव का सहस्त्र गुण हमारे जीवन को नई दिशा देंगे। प्रवर्तक मदन मुनि महाराज भी बड़े सरल और निर्मल संत थे। जब जब भी उनके सानिध्य में दर्शन हेतु जाते तो वे आदर और प्रेम से अपना वात्सल्य बरसाते।
मंत्री हीरालाल गोखरू बताया कि इस अवसर पर आसींद,पारसोली,पाटन, चैनपुरा, परा आदि गांव नगरों से भक्तों का आगमन हुआ। शांतिलाल बणवट,राजेंद्र चौधरी, हीरालाल गोखरू, मंजू कर्णावट ने अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रभावना शांतिलाल संचेती, की तरफ से वितरण की गई। आयोजन के लाभार्थी पवनकुमार पुत्र स्व. चांदमल संचेती रहे।